अरोचकनिदानम्

श्लोक 1

अरोचकनिदानम्

अथारोचकनिदानम् |
वातादिभिः शोकभयातिलोभक्रोधैर्मनोघ्नाशनरूपगन्धैः |
अरोचकाः स्युः … |१|
(च. चि. अ. २६) |

श्लोक 1

वातिकारोचकलक्षणम्

… परिहृष्टदन्तः कषायवक्त्रश्च मतोऽनिलेन ||१||
(च. चि. अ. २६) |

श्लोक 2

पैत्तिकारोचकलक्षणम्

कट्वम्लमुष्णं विरसं च पूति पित्तेन विद्यात् … |२|
(च. चि. अ. २६) |

श्लोक 2

श्लैष्मिकारोचकलक्षणम्

… लवणं च वक्त्रम् |
माधुर्यपैच्छिल्यगुरुत्वशैत्यविबद्धसम्बद्धयुतं कफेन ||२||
(च. चि. अ. २६) |

श्लोक 3

आगन्तुजारोचकलक्षणम्

अरोचके शोकभयातिलोभक्रोधाद्यहृद्याशुचिगन्धजे स्यात् |
स्वाभाविकं चास्यमथारुचिश्च … |३|
(च. चि. अ. २६) |

श्लोक 3

त्रिदोषजारोचकलक्षणम्

… त्रिदोषजे नैकरसं भवेत्तु ||३||
(च. चि. अ. २६) |

श्लोक 4

वातजादिभेदेनारोचककृताऽन्यदेशविकृतिः

हृच्छूलपीडनयुतं पवनेन, पित्तात्तृड्दाहचोषबहुलं, सकफप्रसेकम् |
श्लेष्मात्मकं, बहुरुजं बहुभिश्च विद्याद्वैगुण्यमोहजडताभिरथापरं च ||४||
(च. चि. अ. २६) |

पुष्पिका

इति श्रीमाधवकरविरचिते माधवनिदाने अरोचकनिदानं समाप्तम्  ||१४||